स्वामी जी ने वर अनंत और वधू राधिका को पुष्पहार पहनाकर उन्हें स्वस्थ, सुखी, समृद्ध व प्रेममय दाम्पत्य जीवन का आशीर्वाद दिया।

 

स्वामी जी ने कहा कि अनंत व राधिका के विवाह समारोह में एक ओर पूज्य शंकराचार्य जी का सनातन संस्कृति व मर्यादा के अनुरूप पूजन वहीं दूसरी ओर पूज्य संतों का दिव्य अभिनन्दन। पूरा अंबानी परिवार सहृदयता से अपने अतिथियों के अभिनंदन हेतु समर्पित था। शुभविवाह में ऐसा वातावरण था मानों वैकुण्ठ स्वयं धरती पर उतर आया हो। विवाह के दौरान संस्कारों का दर्शन, संस्कृति का दर्शन, सनातन का दर्शन, सब कुछ बड़ा ही दिव्य व भव्य था। साथ ही पूरे अंबानी परिवार की सरलता, सात्विकता और सहजता सब कुछ हृदय को छु जाने वाला था।

स्वामी जी ने कहा कि अनंत व राधिका के जयमाल के समय श्री मुकेश अंबानी जी ने पांरम्परिक विवाह पद्धति, सनातन संस्कृति व भारतीय दर्शन की जो व्याख्या की वह अवर्णनीय थी। वास्तव में यह विवाह भारतीय मर्यादा, संस्कृति, संस्कार व दर्शन की युगों-युगों तक आने वाली पीढ़ियों के लिये एक आदर्श स्थापित करेगा। वैभवशाली होना एक बात है परन्तु उस वैभव के अपने देश व संस्कृति के अनुरूप पूरी दुनिया को दर्शन करना केवल संस्कृति को समर्पित व्यक्तित्व की कर सकते हैं। स्वामी जी ने वर अनंत और वधू राधिका को पुष्पहार पहनाकर उन्हें स्वस्थ, सुखी, समृद्ध व प्रेममय दाम्पत्य जीवन का आशीर्वाद दिया।

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