टोयोटा की अपनी तरह की पहली पायलट परियोजना की शुरुआत
देहरादून, टोयोटा में, हम लोग ग्रह के लिए सम्मान के अपने सिद्धांत के अनुरूप पर्यावरण की रक्षा और स्थिरता के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं। इस दिशा में, 2015 में, टोयोटा ने अपनी वैश्विक पर्यावरणीय चुनौती 2050 की घोषणा की थी। इसके तहत निरंतर बने रहने वाले भविष्य-प्रूफ स्थायी समाज की स्थापना में योगदान किया जाना है। इस महत्वाकांक्षा के तहत, टोयोटा ने अपने लिए छह चुनौतियाँ निर्धारित की हैं। इनमें से पहले तीन में हमारे उत्पादों के पूरे जीवन चक्र में 2050 तक कार्बन तटस्थता हासिल करने के लक्ष्य शामिल है। इस प्रकार, हमारा लक्ष्य न केवल हमारे द्वारा बेचे जाने वाले वाहनों के प्रभाव को संबोधित करना है, बल्कि विनिर्माण गतिविधियों सहित हमारी संपूर्ण मूल्य-श्रृंखला को भी कवर करना है। इस अर्थ में, हम टेलपाइप उत्सर्जन से आगे जाने की इच्छा रखते हैं और अपने स्थायी हस्तक्षेपों में अधिक समग्र तथा समाज केंद्रित दृष्टिकोण अपनाते हैं।
विद्युतीकरण और वैकल्पिक ईंधन में कई हरित ऊर्जा मार्ग हैं जो परिवहन क्षेत्र को अपने कार्बन पदचिह्न को कम करने के साथ-साथ जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने में मदद कर सकते हैं। टोयोटा ने सभी स्वच्छ प्रौद्योगिकियों का विकास किया है और प्रत्येक देश की अनूठी आवश्यकताओं तथा संदर्भ के आधार पर इन्हें पेश करने में विश्वास करता है, ताकि जीवाश्म ईंधन के उपयोग को कम किया जा सके और सबसे तेजी से संभव समय में कार्बन की कमी को प्राप्त किया जा सके। इस दिशा में, भारत में भिन्न किस्म की ऊर्जा, इसकी अनूठी उपभोक्ता प्रोफ़ाइल और जरूरतें, तैयार संरचना और 2047 तक ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में सरकार के विविध प्रयासों को देखते हुए, हम अधिक दक्षता के साथ समाधान आगे बढ़ा रहे हैं, जिससे कई स्वच्छ प्रौद्योगिकी रास्ते की शुरुआत और समर्थन हो रहा है।
सबसे उपयुक्त समाधानों में से एक के रूप में, इथेनॉल की भारत में जबरदस्त संभावना है क्योंकि यह एक स्वदेशी और स्वच्छ ऊर्जा स्रोत है, जो जीवाश्म ईंधन की खपत, ऊर्जा आयात बिल और कार्बन उत्सर्जन को काफी कम कर सकता है। कृषि आधारित होने के कारण, ईंधन के रूप में इथेनॉल के अधिक उपयोग से किसानों की आय में भी वृद्धि होगी और नए रोजगार के मौके बनेंगे। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा और अतिरिक्त चीनी तथा खाद्यान्न से सरकार के लिए राजस्व में वृद्धि होगी। सरकार ने हाल ही में पराली जैसे कृषि अवशेषों से इथेनॉल के उत्पादन के लिए दूसरी पीढ़ी की तकनीक शुरू की है, जो वर्तमान में अन्यथा जला दिया जाता है। यह संभावना न केवल गंभीर वायु प्रदूषण को रोकेगी बल्कि कचरे से धन उत्पन्न करने में भी मदद करेगी।
