पछुवादून गढ़वाल सभा की दिनकर विहार स्थित सभा भवन में रविवार को संपन्न हुई आम बैठक में गढ़वाली संस्कृति के
देहरादून (संवाददाता)। पछुवादून गढ़वाल सभा की दिनकर विहार स्थित सभा भवन में रविवार को संपन्न हुई आम बैठक में गढ़वाली संस्कृति के संरक्षण व प्रचार-प्रसार पर मंथन हुआ।
सभा में मौजूद लोगों ने संस्कृति के संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास किए जाने की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि संस्कृति किसी भी समाज विशेष की पहचान होती है। लिहाजा समाज से जुड़े हर व्यक्ति का नैतिक दायित्व है कि वह संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए परंपराओं व रीति-रिवाजों को शिद्दत से मनाते रहे। बैठक में 29 जनवरी को नई कार्यकारिणी के चुनाव संपन्न कराने का निर्णय लिया गया।
बैठक की अध्यक्षता कर रहे पीसी केष्टवाल ने युवा सदस्यों से कहा कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए नैतिक मूल्यों का होना जरूरी है। नैतिक मूल्य व्यक्ति को उसकी पारंपरिक संस्कृति से प्राप्त होते हैं।
कहा कि किसी भी संस्कृति की अपनी परंपराएं व रीति-रिवाज होते हैं, जो व्यक्ति को समाज में रहते हुए नैतिकता का पाठ पढ़ाते हैं। लिहाजा युवा पीढ़ी को संस्कृति की जड़ों से जुड़ा रहना जरूरी है।
संस्कृति के प्रचार-प्रसार से समाज की विशिष्ट पहचान बनी रहती है। जबकि, संस्कृति के पतन से समाज का पतन होता है।
रोशन नेगी ने कहा कि गढ़वाली संस्कृति पूरे राष्ट्र में अपनी विशिष्ट पहचान बनाए हुए है। इस पहचान को मूल संस्कृति के साथ बरकरार रखना युवाओं की जिम्मेदारी है। बैठक में सभा के तीन साल के कार्यों की प्रगति पर भी चर्चा की गई। कार्यकारिणी के चुनाव के लिए महेंद्र सिंह नेगी पर्यवेक्षक, जीवन सजवाण, विनय कांत नौटियाल को चुनाव अधिकारी नामित किया गया। इस दौरान शंभू प्रसाद नैथानी, ओपी राणा, माधवानंद रतूड़ी, पूरण प्रसाद भट्ट, कमलेश रावत, मोहिनी नौटियाल आदि मौजूद रहे।
